दिवाली का अर्थ और महत्व
दीपावली का अर्थ है "दीपों की पंक्ति"। यह पर्व कार्तिक मास की अमावस्या, यानी महीने की सबसे अँधेरी रात को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में लक्ष्मी पूजा का मुख्य दिन रविवार, 8 नवंबर है। इस रात घर, दुकानें और गलियाँ दीयों और रोशनी से जगमगा उठती हैं, मानो कह रही हों कि सबसे अँधेरी रात को भी उजाले से भरा जा सकता है। अधिकतर हिंदू परिवारों के लिए यह साल का सबसे बड़ा त्योहार है। जैन समाज इसी दिन भगवान महावीर के निर्वाण को याद करता है और सिख समाज बंदी छोड़ दिवस मनाता है।
दिवाली सफ़ाई, नई शुरुआत और कृतज्ञता का पर्व है। लोग घरों की सफ़ाई और रंग-रोगन करते हैं, नए कपड़े खरीदते हैं, मिठाइयाँ और नमकीन बनाते हैं, रिश्तेदारों से मिलते हैं और धन के लिए माँ लक्ष्मी तथा बुद्धि के लिए गणेश जी की पूजा करते हैं। व्यापारी पुराने खाते बंद करके नए बही-खाते शुरू करते हैं, इसलिए कई व्यवसायों के लिए यह नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत भी है।
दिवाली की कथाएँ
श्रीराम का अयोध्या आगमन
सबसे प्रिय कथा रामायण से है। चौदह वर्ष के वनवास और रावण पर विजय के बाद श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे। अयोध्यावासी इतने प्रसन्न हुए कि उन्होंने अमावस्या की अँधेरी रात में अपने राजा के स्वागत के लिए हर गली में घी के दीये जलाए। दीप जलाने की वही परंपरा आज भी चली आ रही है।
माँ लक्ष्मी और समृद्धि की रात
पुराणों के अनुसार माँ लक्ष्मी समुद्र मंथन से प्रकट हुई थीं। मान्यता है कि दिवाली की रात वे उन घरों में आती हैं जो साफ़-सुथरे, रोशन और आपसी प्रेम से भरे हों। इसीलिए लोग दरवाज़े खुले रखते हैं, मुख्य द्वार पर दीपक जलाते हैं, रंगोली बनाते हैं और घर के भीतर आते हुए देवी के छोटे-छोटे पदचिह्न बनाते हैं। उनके साथ गणेश जी की पूजा होती है, क्योंकि बुद्धि के बिना धन का कोई अर्थ नहीं। कई परिवार देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर की भी पूजा करते हैं।
2026 में दिवाली के पाँच दिन
- धनतेरस, शुक्रवार 6 नवंबर: आरोग्य के देवता धन्वंतरि का दिन। लोग सोना, चाँदी, बर्तन या नई झाड़ू खरीदते हैं और शाम को दरवाज़े पर यम का दीपक जलाते हैं।
- नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली या रूप चौदस), शनिवार 7 नवंबर: श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर के वध की याद। कई लोग सुबह जल्दी उबटन लगाकर स्नान करते हैं और शाम को दीये जलाते हैं।
- दिवाली और लक्ष्मी पूजा, रविवार 8 नवंबर: त्योहार की मुख्य रात, पूजा, दीपों और मिठाइयों के साथ।
- गोवर्धन पूजा और अन्नकूट, मंगलवार 10 नवंबर: श्रीकृष्ण द्वारा ब्रजवासियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत उठाने की याद। मंदिरों में अन्नकूट का भोग लगता है। 2026 में अमावस्या 9 नवंबर तक चलने के कारण यह एक दिन बाद पड़ रही है।
- भाई दूज, बुधवार 11 नवंबर: बहनें भाइयों को तिलक लगाकर उनकी लंबी आयु की कामना करती हैं और भाई उनकी रक्षा का वचन देते हैं।
लक्ष्मी पूजा विधि
पूजा सामग्री
- लाल कपड़े पर माँ लक्ष्मी और गणेश जी की प्रतिमा या तस्वीर
- जल, आम के पत्ते और नारियल वाला कलश
- रोली, कुमकुम, हल्दी, अक्षत, चंदन और कुछ सिक्के
- दीये (रात भर जलने वाला कम से कम एक बड़ा घी का दीपक), अगरबत्ती और कपूर
- कमल या गेंदे के फूल और माला
- भोग के लिए खील-बताशे, मिठाई, फल और मेवे
- बही-खाते, तिजोरी या नई डायरी, चोपड़ा पूजन के लिए
पूजा के चरण
- दिन में पूरे घर की सफ़ाई करें, द्वार पर रंगोली बनाएँ और आम या अशोक के पत्तों का तोरण लगाएँ।
- शाम को स्नान करके नए या साफ़ कपड़े पहनें।
- चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएँ, चावल की छोटी ढेरी बनाकर उस पर कलश रखें। माँ लक्ष्मी के बाईं ओर गणेश जी को विराजमान करें।
- बड़ा घी का दीपक जलाएँ और परिवार की मंगलकामना का संकल्प लें।
- सबसे पहले रोली, अक्षत, फूल और मिठाई से गणेश जी की पूजा करें।
- फिर माँ लक्ष्मी को कुमकुम, फूल, सिक्के, खील-बताशे और मिठाई अर्पित करें और "ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः" का जाप करें।
- बही-खाते, तिजोरी और औज़ारों की पूजा करें। नई बही पर "शुभ" और "लाभ" लिखें और स्वस्तिक बनाएँ।
- पूरा परिवार मिलकर लक्ष्मी-गणेश की आरती करे।
- दरवाज़े, खिड़कियों, रसोई, पानी की टंकी और तुलसी के पास दीये रखें और सबको प्रसाद बाँटें।
2026 का मुहूर्त
अमावस्या तिथि 8 नवंबर 2026 को सुबह लगभग 11:27 बजे से 9 नवंबर को दोपहर लगभग 12:31 बजे तक रहेगी। नई दिल्ली के लिए लक्ष्मी पूजा मुहूर्त शाम लगभग 5:54 से 7:50 बजे तक है, जब प्रदोष काल (लगभग 5:31 से 8:09 बजे) और स्थिर वृषभ लग्न एक साथ होते हैं। कुछ परिवार और व्यापारी आधी रात के आसपास निशीथ काल में भी पूजा करते हैं। ये समय नई दिल्ली के हैं; अपने शहर का समय ज़रूर देखें, क्योंकि हर जगह सूर्यास्त और लग्न का समय अलग होता है।
गुजरात में दिवाली
गुजरात में दिवाली के मौसम का अपना ही रंग है। इसकी शुरुआत वाघ बारस से होती है, जब गाय और बछड़ों की पूजा की जाती है। धनतेरस पर घरों में गहनों और सिक्कों को धोकर पूजा जाता है, और काली चौदस पर कई परिवार हनुमान जी और माँ काली से नकारात्मकता दूर करने की प्रार्थना करते हैं। दिवाली की रात चोपड़ा पूजन यानी नए बही-खातों की पूजा होती है। गुजरात में अमांत पंचांग चलता है, इसलिए यहाँ दिवाली साल का आख़िरी दिन होती है। इसके बाद की प्रतिपदा बेसतु वरस, यानी गुजराती नववर्ष है, जो 2026 में मंगलवार, 10 नवंबर को है और इसी दिन विक्रम संवत 2083 शुरू होगा। लोग नए कपड़े पहनकर मंदिर जाते हैं, बड़ों के पैर छूते हैं और "साल मुबारक" व "नूतन वर्षाभिनंदन" कहकर मिलते हैं। 11 नवंबर को भाई बीज आती है, और दुकानें आमतौर पर लाभ पंचमी पर फिर से खुलती हैं। मेहमानों के लिए घरों में मठिया, चोराफली, घुघरा और मिठाइयाँ बनती हैं।
सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल दिवाली
- प्लास्टिक की सजावट की जगह मिट्टी के दीये और एलईडी लाइटें लगाएँ, और ज़रूरत न हो तो बंद कर दें।
- पटाखे जलाएँ तो स्थानीय नियमों का पालन करें, जहाँ अनुमति हो वहाँ ग्रीन पटाखे चुनें और पास में पानी की बाल्टी रखें।
- बच्चों, बुज़ुर्गों और पालतू जानवरों का ध्यान रखें; तेज़ आवाज़ से पशु-पक्षी डर जाते हैं।
- दीयों के पास सूती कपड़े पहनें और परदों के पास जलती मोमबत्ती कभी न छोड़ें।
- फूलों, चावल के आटे या प्राकृतिक रंगों से रंगोली बनाएँ।
- घर की बनी मिठाई, पौधे या स्थानीय हस्तशिल्प उपहार में दें और ज़रूरतमंदों के साथ खुशियाँ बाँटें।
दिवाली की शुभकामनाएँ कैसे भेजें
दिवाली पर सबसे ज़्यादा शुभकामनाएँ भेजी जाती हैं, इसलिए अपना संदेश ख़ास बनाने के लिए रिश्ते के अनुसार शुभकामना चुनें, चाहे दोस्त हो, भाई-बहन, जीवनसाथी या ग्राहक, और दीये वाले डिज़ाइन में अपना नाम जोड़कर दिवाली कार्ड बनाएँ। कार्ड डाउनलोड करके व्हाट्सऐप पर भेजें या स्टेटस पर लगाएँ। व्यापारी धनतेरस या दिवाली की सुबह ग्राहकों को कार्ड भेज सकते हैं, जबकि परिवार और दोस्तों को दिवाली की रात या गुजरात में नववर्ष की सुबह कार्ड पाना अच्छा लगता है।