नामकरण संस्कार क्या है
हिंदू परंपरा के सोलह संस्कारों में नामकरण पाँचवाँ संस्कार माना जाता है। शिशु के जन्म के कुछ दिनों बाद, प्रायः ग्यारहवें या बारहवें दिन, या परिवार की परंपरा के अनुसार किसी शुभ दिन, पंडित जी जन्म नक्षत्र और राशि देखकर नाम का पहला अक्षर सुझाते हैं। फिर पूजा, हवन और मंत्रों के साथ शिशु के कान में उसका नाम धीरे से बोला जाता है। इसके बाद परिवार के बड़े शिशु को आशीर्वाद देते हैं।
अलग-अलग क्षेत्रों में इसके नाम और रिवाज़ भिन्न हैं। उत्तर भारत में कई परिवार छठी मनाते हैं, जो जन्म के छठे दिन होती है। गुजरात में नामकरण की रस्म प्रायः बुआ निभाती है, जो शिशु का नाम रखती है, और इसे नामकरण विधि या फईबा के नाम रखने की रस्म के रूप में जाना जाता है। महाराष्ट्र में इसे बारसा कहा जाता है, जिसमें शिशु को पालने में झुलाकर नाम रखा जाता है। कई परिवार नामकरण और अन्नप्राशन या मुंडन को अलग-अलग समय पर मनाते हैं।
कार्ड में क्या लिखें
- मंगल वचन: ॥ श्री गणेशाय नमः ॥
- शीर्षक: नामकरण संस्कार, छठी पूजन या बारसा।
- शिशु का उल्लेख: यदि नाम पहले से तय है तो नाम, वरना हमारे नन्हे राजकुमार या हमारी नन्ही परी जैसे शब्द।
- माता-पिता के नाम: चि. या सौ. के साथ, या सरल रूप में।
- तारीख, समय, स्थान: पूजा और भोजन का समय अलग हो तो दोनों लिखें।
- निमंत्रक: दादा-दादी या पूरा परिवार।
- विशेष सूचना: संपर्क नंबर या कोई अनुरोध।
नाम बताएँ या सरप्राइज़ रखें
कई परिवार शिशु का नाम समारोह में ही सबके सामने घोषित करना पसंद करते हैं। ऐसे में कार्ड पर नाम न लिखें, बल्कि नन्हे सदस्य या हमारा लाडला/लाडली जैसे शब्द रखें। दूसरी ओर, कुछ परिवार नाम पहले ही तय कर लेते हैं और कार्ड पर ही बड़े अक्षरों में लिख देते हैं। दोनों तरीके सुंदर हैं। यदि नाम सरप्राइज़ है, तो आप समारोह के बाद एक और कार्ड बनाकर नाम की घोषणा कर सकते हैं: हमारे नन्हे सदस्य का नाम है...।
पारंपरिक और आधुनिक शब्द
पारंपरिक
ईश्वर की असीम कृपा से हमारे परिवार में पुत्र रत्न का आगमन हुआ है। शिशु का नामकरण संस्कार शुभ मुहूर्त में संपन्न होगा। इस मंगल अवसर पर आप सपरिवार पधारकर शिशु को आशीर्वाद दें।
बेटी के लिए इसी तरह लक्ष्मी स्वरूपा कन्या रत्न जैसे शब्द प्रयोग किए जाते हैं।
आधुनिक
हमारी नन्ही परी को अब एक नाम मिलने वाला है। इस ख़ास दिन पर आइए और उसे अपना प्यार दीजिए।
शिशु की ओर से लिखी पंक्ति भी बहुत पसंद की जाती है: मैं आ गया हूँ, अब मेरा नाम जानने आप ज़रूर आइए।
नमूना प्रारूप
- ऊपर मंगल वचन।
- बड़े अक्षरों में: नामकरण संस्कार।
- शिशु का नाम या नन्हे सदस्य का उल्लेख।
- माता-पिता के नाम।
- एक आमंत्रण पंक्ति।
- तारीख, समय, स्थान।
- निमंत्रक दादा-दादी या परिवार।
कब भेजें
नामकरण की तारीख अक्सर जन्म के बाद ही तय होती है और समय कम होता है। इसलिए कार्ड तारीख तय होते ही, कम से कम पाँच से सात दिन पहले भेज दें। करीबी रिश्तेदारों को फ़ोन करके भी बताएँ। एक दिन पहले लोकेशन के साथ छोटा रिमाइंडर भेजें। समारोह के बाद शिशु की तस्वीर और नाम के साथ धन्यवाद संदेश भेजें। यह संदेश उन लोगों के लिए भी अच्छा है जो आ नहीं पाए।
शिष्टाचार और संवेदनशीलता
- माँ और शिशु का स्वास्थ्य सबसे पहले है। कार्यक्रम छोटा रखें और बहुत अधिक मेहमान न बुलाएँ।
- नवजात को बहुत से लोग गोद में न लें, यह अनुरोध संदेश में विनम्रता से किया जा सकता है।
- शिशु की तस्वीर सोशल मीडिया पर डालने से पहले माता-पिता की सहमति लें।
- कार्ड में बेटा या बेटी के प्रति समान आदर और आनंद झलके, दोनों ही परिवार की ख़ुशी हैं।
- यदि बुआ या किसी विशेष सदस्य को नाम रखने की रस्म निभानी है, तो उन्हें व्यक्तिगत रूप से पहले बुलाएँ।
नामकरण से जुड़ी अन्य रस्में
नामकरण के आसपास कई परिवार कुछ और छोटी रस्में भी निभाते हैं। कुछ जगह इसी दिन शिशु को पहली बार घर से बाहर लाकर सूर्य दर्शन कराया जाता है। कई परिवारों में शिशु को पहली बार पालने में लिटाने की रस्म होती है, जिसमें बुआ या दादी लोरी गाती हैं। कुछ समुदायों में कुआँ पूजन या जलवा पूजन भी होता है, जिसमें प्रसूता माँ पहली बार पानी भरने की रस्म निभाती है। यदि ऐसी कोई रस्म उसी दिन है, तो कार्ड के साथ भेजे संदेश में उसका समय भी बता दें, ताकि मेहमान उस सुंदर पल को न चूकें। नाम चुनने में परिवार के बड़ों की राय, कुल परंपरा और राशि का अक्षर, सब का ध्यान रखा जाता है, और यही बात इस संस्कार को इतना ख़ास बनाती है।
इस साइट पर कार्ड कैसे बनाएँ
- पहले नाम में शिशु का नाम या नन्हे सदस्य जैसा उल्लेख लिखें।
- तारीख, समय और स्थान भरें।
- निमंत्रक में माता-पिता और दादा-दादी के नाम लिखें, जैसे पूजा-राहुल जैन एवं दादा-दादी।
- पंक्ति चुनें, शिशु की तस्वीर जोड़ें और कार्ड डाउनलोड करें।
- व्हाट्सऐप पर परिवार और मित्रों को भेजें।
शिशु की तस्वीर लगाते समय ऐसी तस्वीर चुनें जिसमें वह आराम से सो रहा हो या मुस्कुरा रहा हो। बहुत पास से ली गई या अधिक रोशनी वाली तस्वीर से बचें। और याद रखें, यह कार्ड आने वाले वर्षों में एक प्यारी याद बन जाएगा, इसलिए इसे सहेज कर रखें।