माँ की कथा
पार्वती जी ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए हज़ारों वर्षों तक कठोर तपस्या की। उन्होंने पहले केवल फल-फूल खाए, फिर सूखे बेलपत्र, और अंत में पत्ते खाना भी छोड़ दिया। इसी कारण उनका एक नाम अपर्णा भी है। उनके इस तप से देवता भी प्रभावित हुए। माँ सफ़ेद वस्त्र पहनती हैं, नंगे पैर चलती हैं, और उनके एक हाथ में जप की माला और दूसरे में कमंडल है। उनकी पूजा से मन में संयम और लक्ष्य के प्रति लगन बढ़ती है।
पूजा कैसे करें
सुबह स्नान करके सफ़ेद या हल्के रंग के कपड़े पहनें। माँ को सफ़ेद फूल, अक्षत और चंदन चढ़ाएँ। शक्कर या मिश्री का भोग लगाएँ और बाद में इसे परिवार में बाँटें। शांत मन से मंत्र जप करें।
मंत्र
ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः
शुभकामना संदेश
माँ ब्रह्मचारिणी आपकी मेहनत को सफलता में बदल दें। नवरात्रि के दूसरे दिन की शुभकामनाएँ!
धैर्य और संयम से बड़ी कोई शक्ति नहीं। माँ ब्रह्मचारिणी आपको ये दोनों वरदान दें। जय माता दी!
जीवन की हर तपस्या का मीठा फल मिले, यही माँ से प्रार्थना है। शुभ नवरात्रि!