माँ की कथा
जब सृष्टि नहीं थी और चारों ओर अंधकार था, तब माँ कूष्मांडा ने अपनी हल्की मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की। इसलिए उन्हें सृष्टि की आदि शक्ति कहा जाता है। माना जाता है कि वे सूर्य के भीतर निवास करती हैं और वहीं से पूरे संसार को प्रकाश और ऊर्जा देती हैं। उनकी आठ भुजाएँ हैं, इसलिए उन्हें अष्टभुजा देवी भी कहते हैं, और वे सिंह पर सवार हैं। उनकी पूजा अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु के लिए विशेष मानी जाती है।
पूजा कैसे करें
माँ को मालपुए का भोग लगाएँ और लाल या पीले फूल चढ़ाएँ। पूजा के बाद मालपुआ प्रसाद के रूप में परिवार और पड़ोसियों में बाँटें। मंत्र जप के साथ घर के सभी सदस्यों की सेहत के लिए प्रार्थना करें।
मंत्र
ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः
शुभकामना संदेश
जिस मुस्कान से सृष्टि बनी, वही मुस्कान हमेशा आपके चेहरे पर रहे। जय माँ कूष्मांडा!
माँ कूष्मांडा आपको अच्छी सेहत, लंबी उम्र और ढेर सारी खुशियाँ दें। नवरात्रि के चौथे दिन की शुभकामनाएँ!
सूरज की तरह आपका जीवन भी हमेशा रोशन रहे। शुभ नवरात्रि!