माँ की कथा
भगवान कार्तिकेय का एक नाम स्कंद है। उनकी माता होने के कारण देवी को स्कंदमाता कहा जाता है। कार्तिकेय देवताओं के सेनापति बने और उन्होंने तारकासुर का वध किया। माँ की गोद में बाल रूप में स्कंद बैठे रहते हैं। माँ कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं, इसलिए उन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है, और उनका वाहन सिंह है। मान्यता है कि उनकी पूजा से संतान सुख मिलता है और साथ ही बाल रूप कार्तिकेय की पूजा भी अपने आप हो जाती है।
पूजा कैसे करें
माँ को पीले फूल और केले का भोग लगाएँ। परिवार के बच्चों को पूजा में साथ बैठाएँ और उनके लिए आशीर्वाद माँगें। दीपक जलाकर मंत्र जप और आरती करें।
मंत्र
ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः
शुभकामना संदेश
माँ स्कंदमाता अपनी ममता से आपके परिवार को हर मुश्किल से बचाएँ। नवरात्रि के पाँचवें दिन की शुभकामनाएँ!
जैसे माँ अपने बच्चे को गोद में संभालती है, वैसे ही माँ स्कंदमाता आपको संभालें। जय माता दी!
आपके घर के बच्चों पर माँ का आशीर्वाद हमेशा बना रहे। शुभ नवरात्रि!