माँ की कथा
महर्षि कात्यायन ने देवी को पुत्री के रूप में पाने के लिए तप किया था। उनके आश्रम में प्रकट होने के कारण देवी का नाम कात्यायनी पड़ा। जब महिषासुर के अत्याचार से देवता परेशान थे, तब माँ कात्यायनी ने उससे युद्ध किया और उसका वध किया। मान्यता है कि वृंदावन की गोपियों ने श्रीकृष्ण को पाने के लिए यमुना किनारे माँ कात्यायनी की पूजा की थी। इसलिए अच्छे जीवनसाथी की कामना के लिए भी उनकी पूजा की जाती है। माँ सिंह पर सवार हैं।
पूजा कैसे करें
माँ को लाल या पीले फूल और शहद का भोग लगाएँ। मंत्र जप के बाद मन की इच्छा माँ के सामने रखें। शाम को आरती के बाद प्रसाद बाँटें।
मंत्र
ॐ देवी कात्यायन्यै नमः
शुभकामना संदेश
जैसे माँ कात्यायनी ने महिषासुर को हराया, वैसे ही आप भी हर मुश्किल पर जीत पाएँ। शुभ नवरात्रि!
माँ कात्यायनी आपकी हर सच्ची इच्छा पूरी करें। नवरात्रि के छठे दिन की शुभकामनाएँ!
शहद जैसी मिठास आपके रिश्तों में हमेशा बनी रहे। जय माँ कात्यायनी!