माँ की कथा
कठोर तपस्या के कारण पार्वती जी का रंग सांवला पड़ गया था। जब भगवान शिव ने प्रसन्न होकर उन्हें गंगाजल से स्नान कराया, तो उनका रूप अत्यंत गौर और उज्ज्वल हो गया। तभी से वे महागौरी कहलाईं। माँ सफ़ेद वस्त्र पहनती हैं और बैल पर सवार हैं। उनका रूप बहुत शांत और करुणा से भरा है। मान्यता है कि उनकी पूजा से पुराने दुख दूर होते हैं और मन निर्मल होता है।
पूजा कैसे करें
माँ को नारियल का भोग लगाएँ और सफ़ेद या गुलाबी फूल चढ़ाएँ। अष्टमी पर कन्या पूजन करने वाले परिवार 2 से 10 साल की नौ कन्याओं और एक बालक को घर बुलाकर उनके पैर धोते हैं, तिलक लगाते हैं और हलवा, पूरी व चने खिलाकर उपहार देते हैं। कई जगह इस दिन हवन भी होता है।
मंत्र
ॐ देवी महागौर्यै नमः
शुभकामना संदेश
माँ महागौरी आपके जीवन को पवित्रता और खुशियों से भर दें। महाअष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ!
आज के कन्या पूजन के साथ आपके घर में माँ दुर्गा का वास हो। जय माँ महागौरी!
पुराने दुख पीछे छूट जाएँ और नई खुशियाँ आपका इंतज़ार करें। शुभ अष्टमी!